यात्रा संस्मरण :
विज्ञान की दुनिया और नागपुर की स्मृतियाँ लेखक : आशु
कक्षा : 11वीं
विद्यालय : पी.एम. श्री एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय कटेकल्याण, दंतेवाड़ा
"शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, यह बाहरी दुनिया के अनुभवों से भी निखरती है।"
राष्ट्रीय आविष्कार अभियान पीएम श्री योजना के तहत हमारे जिला प्रशासन दंतेवाड़ा द्वारा एक अद्भुत शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया। 22 दिसंबर से 25 दिसंबर 2025 तक चले इस कार्यक्रम ने हम विद्यार्थियों को विज्ञान और संस्कृति के नए पहलुओं से रूबरू कराया।
यात्रा का आगाज़ और रमन विज्ञान केंद्र
कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव सर और जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा सर के मार्गदर्शन में हमारा 33 सदस्यीय दल महाराष्ट्र के नागपुर पहुँचा। हमारी पहली मंजिल थी 'रमन विज्ञान केंद्र'। वहाँ का परिसर इतना सुंदर है कि देखते ही बनता है। हालांकि वहाँ जानकारी बोर्ड्स पर मराठी में लिखी थी, लेकिन विज्ञान की भाषा सार्वभौमिक होती है। जिन सिद्धांतों को हम केवल किताबों में पढ़ते थे, उन्हें वहाँ साक्षात 'प्रैक्टिकली' अनुभव करना जादुई था।
विज्ञान के चमत्कार: न्यूटन के नियम से लेकर तारामंडल तक
विज्ञान केंद्र में हमने कई प्रयोग देखे:
न्यूटन का तीसरा नियम: क्रिया के विपरीत प्रतिक्रिया।
घर्षण और दोलनकाल: भौतिकी के इन कठिन सिद्धांतों को हमने खिलौनों और मॉडलों के माध्यम से समझा।
3D शो और तारामंडल: प्रोजेक्ट के माध्यम से सौर मंडल के ग्रहों और उपग्रहों को देखना इतना वास्तविक था कि मुझे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था।
इन प्रयोगों ने विज्ञान के प्रति मेरी समझ और जिज्ञासा को कई गुना बढ़ा दिया।
नागपुर के सांस्कृतिक दर्शन
विज्ञान के साथ-साथ हमें नागपुर के प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर (दीक्षाभूमि) जाने का भी सौभाग्य मिला। वहाँ भगवान बुद्ध की प्रतिमा के दर्शन किए और डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के जीवन, उनके विचारों और उनके ऐतिहासिक भाषणों के बारे में पोस्टर के माध्यम से बहुत कुछ जाना। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मुझे नागपुर आने का मौका मिलेगा।
आभार और निष्कर्ष:
इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य हम ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवाचार और तार्किक सोच को बढ़ावा देना था। कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकलकर व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करना मेरे लिए जीवन का एक बड़ा अवसर था।
मैं अपने विद्यालय के प्राचार्य कुलदीप सर, उप-प्राचार्य टी.एल. साहू सर और सभी शिक्षकों का हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ। साथ ही, जिला प्रशासन दंतेवाड़ा को धन्यवाद देती हूँ और निवेदन करती हूँ कि भविष्य में भी मेरे जैसे आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को ऐसे अवसर प्रदान किए जाएँ।
धन्यवाद!🙏